मंदिर के प्रभाव से मगरमच्छ वेजिटेरियन हो गया

भारत में ऐसे कई स्थान हैं जिनका रहस्य आज भी बरकरार है। ऐसा ही रहस्य समेटे हुए है केरल का अनंतपुर मंदिर, जिसकी रक्षा करता है मगरमच्छ। इस मगरमच्छ की खास बात यह है कि यह पूरी तरह से शाकाहारी है और सिर्फ प्रसाद ही खाता है।  

आगे जानिए क्यो ये मगरमच्छ है शाकाहारी और दर्शन कीजिये इस मंदिर की मूर्ति का जो 70 से ज्यादा औषधियों से बनी है (पथ्थर या धातु से नहीं बनी मूर्ति)

‘बबिआ’ नाम से मशहूर

केरल का अनंतपुर मंदिर दुनियाभर में मंदिर की रखवाली करने वाले एक मगरमच्छ की वजह से चर्चा में है । ‘बबिआ’ नाम के मगरमच्छ से मशहूर इस मंदिर में यह मान्यता है कि जब इस झील में एक मगरमच्छ की मृत्यु होती है तो रहस्यमयी ढंग से दूसरा मगरमच्छ प्रकट हो जाता है।

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पुजारियों के हाथ से ही खाता है प्रसाद

बबिआ’ मगरमच्छ अनंतपुर मंदिर की झील में करीब 60 सालों से रह रहा है। भगवान की पूजा के बाद भक्तों द्वारा चढ़ाया गया प्रसाद बबिआ को खिलाया जाता है। प्रसाद खिलाने की अनुमति सिर्फ मंदिर प्रबंधन के लोगों को है। मान्यता है कि यह मगरमच्छ पूरी तरह शाकाहारी है और प्रसाद इसके मुंह में डालकर खिलाया जाता है।

anantpur 9
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मरने के अगले दिन जिंदा मिला

माना जाता है कि 1945 में एक अंग्रेज सिपाही ने तालाब में मगरमच्छ को गोरी मारकर मार डाला और अविश्वसनीय रूप से अगले ही दिन वही मगरमच्छ झील में तैरता मिला। कुछ ही दिनों बाद अंग्रेज सिपाही की सांप के काट लेने से मौत हो गई। लोग इसे सांपों के देवता अनंत का बदला मानते हैं। माना जाता है कि अगर आप भाग्यशाली हैं तो आज भी आपको इस मगरमच्छ के दर्शन हो जाते हैं।

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70 से ज्यादा औषधियों से बनी है इस मंदिर की मूर्तियां

इस मंदिर की मूर्तियां धातु या पत्थर की नहीं बल्कि 70 से ज्यादा औषधियों की सामग्री से बनी हैं। इस प्रकार की मूर्तियों को ‘कादु शर्करा योगं’ के नाम से जाना जाता है। हालांकि, 1972 में इन मूर्तियों को पंचलौह धातु की मूर्तियों से बदल दिया गया था, लेकिन अब इन्हें दोबारा ‘कादु शर्करा योगं’ के रूप में बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यह मंदिर तिरुअनंतपुरम के अनंत-पद्मनाभस्वामी का मूल स्थान है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि भगवान यहीं आकर स्थापित हुए थे।