भारत का ये इलाका इनकी है अलग न्यायव्यवस्था और संसद

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भारत में प्राचीन काल से ही लोकतांत्रिक प्रणाली रही है। हिमाचल प्रदेश का यह गाव भी साक्षी है।

  • राजाशाही में भी प्रजा का अंकुश होता था। पंचायत तंत्र अति प्राचीन है।
  • 500 परिवारों का छोटा गाव मलाणा जो 12000 फुट की ऊंचाई पर चंद्रखानी पहाड़ पर कुल्लू में स्थित है
  • कहा जाता है को वो विश्व की प्राचीन संसद वाला गाव है। गाव पहाड़ों व वनों से घिरा है।
  • जो उसकी पुरानी परम्परा को बचाए हुए है और बाहरी प्रभाव में नहीं आया।
  • मणिकर्ण के मार्ग पर जारी ग्राम से 9 किलो मीटर पहाड़ी मार्ग पार कर मलाणा पहुंचते हैं।
  • यहां के लोगों का व्यवसाय खेतीबाड़ी, भेड़-बकरी, पशुपालन, जड़ी बूटियां एकत्रित करना है।

आगे जानिये इस गाव के रहस्यों के बारे में जहा एक बहोत बड़े मुग़ल सम्राट की पूजा होती है और बकरा करता है न्याय

 

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कुछ कारण से मूर्तियां गरी कर घाटी में तितर-बितर हो गई।
जहां जो मूर्ति गिरी वह उस बस्ती का देवता बन गया था। लोग बसने लगे।
जमदाग्नि ऋषि सबके पूज्य बन गए और उनका निर्णय अंतिम और मान्य होता था
मलाणा में देवता नहीं हैं, जमलू देवता का खण्डा उनका प्रतीक माना जाता है।

आगे जाने यहाँ मुस्लिम सम्राट की होती है पूजा और गांव में कुछ भी छुआ तो लगता है जुर्माना

 

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हिमाचल प्रदेश का ये सबसे रहस्यमयी गांव है।

  • यहां के निवासी खुद को ‘सिकंदर के सैनिकों का वंशज’ मानते हैं।
  • भारतीय क़ानून नहीं चलते।
  • यहां की अपनी संसद है जो सारे फैसले करती है।
  • अकबर मलाणा के भी रिश्ते है इस गाव से।
  • आप को हैरानी होगी मलाणा भारत का इकलौता गांव है जहां मुग़ल सम्राट अकबर की पूजा की जाती है।

आगे जानिये क्यों होती है अकबर की पूजा

 

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यहां के लोग अपने देवता जमलू के सिवा किसी को भगवान नहीं मानते।

  • अकबर इस गांव को अपने अधीन करना चाहता था।
  • अकबर ने यहां के देवता जमलू की परीक्षा लेनी चाही थी।
  • फिर देवता ने अकबर को सबक सिखाने के दिल्ली में बर्फ गिरवा दी थी।
  • इसके बाद अकबर को जमलू देवता से माफी मांगनी पड़ी थी।
  • गाव के सारे रीति रिवाज हिंदुओं की तरह हैं
  • यहाँ के लोग अपने आपको हिन्दू ही मानते है।
  • गांव में साल में एक बार यहां के मंदिर में अकबर की पूजा की जाती है।
  • इस पूजा को बाहरी लोग नहीं देख सकते हैं।

आगे जाने दूसरी बार जमुले देवता ने अकबर को चमत्कार दिखाया था

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भिक्षा मांगते हुए दिल्ली पहुंचे दो साधुओं को सम्राट अकबर ने पकड़ कर उनसे उनकी झोली में से दक्षिणा छीन ली।
इसके बाद जम्दग्नि ऋषि ने स्वप्न में अकबर साधुओं की वस्तुएं लौटाने को कहा।
अकबर ने वो दक्षिणा वापिस की और साथ में सैनिकों के हाथ इस गाव में अपनी सोने की मूर्ति बनाकर भेजी।
साल में एक बार इस मूर्ति की तब से पूजा हो रही है।

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सिकंदर वापस जा रहा था तब उसके कुछ सैनिक मलाणा में ही रुक गए

  • बहुत से इतिहासकार मलाणावासियों को इंडो-आर्यन मानते हैं।
  • बताते हैं कि एक बार अकबर को किसी गंभीर रोग ने परेशान कर दिया।
  • उस समय उसका इलाज मलाणा में हुआ था।
  • इससे खुश होकर अकबर ने मलाणावासियों को पूर्णत: आजाद कर दिया।
  • तब से यहां पर गांव के अपने ही कानून चल रहे हैं।

आगे जाने यहाँ के रीतिरिवाज

 

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आत्म केन्द्रित से यहां के लोगों के अपने रीति रिवाज हैं,

  • जिनका पूरी निष्ठा तथा कड़ाई से पालन किया जाता है,
  • ग्राम देवता जमलू के प्रति श्रद्धा के कारण ही ये सब इसतरह के रीती रिवाजो से जी रहे है।
  • अपने देवता के सिवाए लोग और किसी देवी-देवता को नहीं मानते।
  • फागली उत्सव में अठारह करडू अपने मंदिर से बाहर निकलते हैं।
  • अकबर की सोने की मूर्ति और चांदी के हिरण को भी बाहर निकाल कर इनकी पूजा की जाती है।
  • कारदारों का कहना है कि अकबर के लिए समर्पित सिर्फ दो त्योहार हैं।
  • उन्होंने बताया कि जम्दग्नि ऋषि और अकबर के बचन के आधार पर सभी हिंदुओं को यहां परंपरा का विधिवत निर्वहन करना पड़ता है।
  • महिलाएं तीन दिन तक शाम के समय जम्दग्नि ऋषि की धर्म पत्नी रेणुका के दरबार में नृत्य करती हैं।
  • ब्रेसतू राम और पुजारी सुरजणू का कहना है कि फागली उत्सव में जम्दग्नि ऋषि के बारह गांवों के लोग देवता की चाकरी के लिए पांच दिन तक मौजूद रहते हैं।

 

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न्याय व्यवस्था

  • इस गाव की अपनी संसद है जो भारतीय संसद लोकसभा और राज्यसभा की ही भांति ज्येष्टांग (अपर हाउस) और कनिष्टांग (लोअर हाउस) है।
  • तीन साल में इस दोनों हाउस के चुनाव होते हैं।
  • धार्मिक मान्यताओं अनुसार यह चुनाव देवता जमदग्रि ऋषि के आदेशानुसार कराए जाते हैं।
  • इस संसद में घरेलु झगडे, ज़मीन-जायदाद के विवाद, हत्या, चोरी और बलात्कार जैसे मामलों पर सुनवाई होती है।
  • दोषी को सजा सुनाई जाती है।
  • अगर संसद किसी विवाद का निपटारा करने में विफल रहती है तो मामला स्थानीय देवता जमलू के सुपुर्द कर दिया जाता है और इस मामले में देवता का निर्णय माना जाता है।

आगे जाने संसद से न्याय ना हुआ तो देवता करते है फेसला ”जिसका बकरा पहले मरा वह दोषी”

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  • जमलू देवता के फैसला सुनाए जाने का तरीका भी बड़ा अजीब है।
  • यहां वादी और प्रतिवादी दोनों पक्षों से एक-एक बकरा मंगाया जाता है।
  • इसके बाद दोनों बकरों की टांग चीरकर उसमें निर्धारित मात्रा में जहर भरा जाता है।
  • जिस पक्ष का भी बकरा पहले मरा उसे दोषी मान लिया जाता है।
  • इसके बाद उस पक्ष को सजा भुगतनी पड़ती है।
  • बकरा मरने के बाद इसको देवता का फैसला माना जाता है।
  • देवता के इस फैसले को कोई चुनौती नहीं दे सकता।
  • अगर किसी ने इस देवता के फैसले को चुनौती देने की कोशिश भी की तो उसे समाज से बाहर निकाल दिया जाता है।
  • देवता के फैसले के समय बकरों को चीरने और जहर भरने का काम चार लोग करते हैं। इन्हें कठियाला कहा जाता है।

देश के हर हिस्से को एक ही तरह के कानून एक ही तरह की न्याय व्यवस्था से अलग एसे गाव होने चाहिए तभी तो वैविध्य रहेगा जो मानवता एक दुसरे को सहन करने की क्षमता बढ़ाएगा