देस का कोई 56 इंच का सीना उद्योगपतियों ने ली हुई लोन का पैसा नहीं भरपाई करवा सकता

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बेंगलुरु

रिजर्व बैंक के गवर्वर रघुराम राजन ने पिछले दिनों कहा था कि कॉरपोरेट सेक्टर को कर्ज की राशि से जन्मदिन की बड़ी पार्टियां आयोजित नहीं करनी चाहिए।

उनका यह इशारा साफतौर पर यूनाइटेड ब्रेवरीज के मालिक विजय माल्या की ओर था।

देश के सबसे बड़े सार्वजनिक बैंक एसबीआई ने भी उन्हें ‘ऐच्छिक डिफॉल्टरों’ की सूची में डाल दिया है, जो जानबूझकर भारी-भरकम लोन की अदायगी नहीं कर रहे हैं।

हाल ही में विजय माल्या ने अपना 60वां जन्मदिन बेहद धूमधाम से गोवा में मनाया था।
उनके इस भड़कीले आयोजन को बचकाना करार दिया गया था।

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राजन ने सीधे तौर पर माल्या पर ही निशाना साधते हुए कहा था, ‘यदि आपकी कंपनी कर्ज में डूबी है और उसके बाद भी आप आलीशान पार्टियां करते हैं तो यह गलत है और इस बात का संदेश जाता है कि आपको किसी बात की परवाह नहीं।

यदि आप मुश्किल में हैं तो आपको अपने खर्च कम करने चाहिए और सार्वजनिक तौर पर भोंडे कार्यक्रमों का आयोजन नहीं किया जाना चाहिए।’

लेकिन विजय माल्या अपनी इस पार्टी का अलग तरह से वर्णन करते हैं।

मुंबई में किंगफिशन अल्ट्रा इंडियन डर्बी के आयोजन में व्यस्ता माल्या ने इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में कहा, ‘मैंने अपने दोस्तों से कहा कि मैं 60 नहीं, बल्कि तीसरी बार अपना 20वां जन्मदिन मना रहा हूं।

मेरी जिंदगी में मेरे मित्र ही सबसे बड़ी दौलत हैं। आज भी मेरे मेहमानों की सूची नहीं बदली है। 30 साल पहले जो लोग मेरी पार्टियों में आते थे, वह आज भी मेरे साथ हैं।’

वहीं माल्या की टीम ने कहा कि वह सिर्फ डर्बी के बारे में ही बात करेंगे। इस साल मुंबई के डर्बी आयोजन की स्पॉन्सरशिप की जिम्मेदारी यूनाइटेड ब्रेवरीज के पास ही है।

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माल्या का खेलों के प्रति पुराना जुनून है।

खेल आयोजनों में खर्च करने को लेकर माल्या ने कहा, ‘रेस में जीत हासिल करना और इंडियन डर्बी में भाग लेना मेरा पुराना शौक रहा है।

लेकिन इसके पीछे मार्केटिंग का एक लॉजिक भी है। इस काम को मैं बीते 32 सालों से कर रहा हूं।’ विजय माल्या उम्र को किसी तरह की बाधा नहीं मानते।

माल्या ने अपने कारोबार के उत्तराधिकार को लेकर कहा, ‘मेरे तीन बच्चे हैं।

तीनों अमेरिकी नागरिक हैं और वहीं रहते हैं। यहां मैं ही अकेला हूं। फिलहाल कारोबार किसे सौंपना है, इसके बारे में किसी तरह की योजना नहीं है।

लेकिन यह समय थोड़ा आराम करने का है। सेमी-रिटायर होने और जिंदगी का मजा लेने का यह समय है।’

एक अनुमान के मुताबिक़ करीब एसे उध्योग पतियों की कम्पनियों में 8 लाख करोड़ रूपया फंसा है |

जाहिर है ये बहोत ही ज्यादा बड़ी रकम है .

कोई आम नागरिक एक बाइक की लोन की किस्ते ना भरे तो गुंडे घर आके मार पिट करके पैसे वसूल करता है और बाइक ले जाता है?

जबकि हजारो करोडो की लोन लेने वाली कंपनियों के लोग बडे एसो आराम से मजे करते है?

पाकिस्तान ने जितना नुकसान नहीं किया होगा उस से ज्यादा देस का नुकसान ये कम्पनिया कर रही है कोई माइकालाल उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता ?

इन फोटो को देख के आपका दिल रो उठेगा