आप मत घबराइये ”तिन बड़ी दिग्गज सरकारी बेंक मुसीबत में है”

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कर्ज फंसने की वजह से सरकारी क्षेत्र के तीन बैंकों के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, देना बैंक और इलाहाबाद बैंक को मंगलवार को भारी नुकसान हुआ है।

वहीं, पंजाब नैशनल बैंक बेहद करीबी अंतर से रेड लिस्ट में शामिल होने से बच गया।

सरकारी बैंकों पर कर्ज के बढ़ते बोझ के चलते स्थिति खराब हो गई है। कर्ज की वापसी न हो पाने की वजह से बैंकों की आर्थिक स्थिति खस्ता हो गई है।

पंजाब नैशनल बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ ऊषा अनंतसुब्रमण्यन ने कहा, ‘सर्जरी अभी खत्म नहीं हुई है। कुछ है जिसे पूरी तरह साफ करने के लिए काफी कुछ साफ करना होगा। इस सर्जरी के दर्द से सभी को गुजरना होगा।’

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मंगलवार को दिसंबर के अंत के बाद के ट्रेंड्स का ऐलान किया गया।

आंकड़ों में दिग्गज निजी बैंक आईसीआईसीआई बैंक की परफॉर्मेंस खराब दिखी, जबकि रिजर्व बैंक के क्लीन ड्राइव के चलते सरकारी बैंक भी बुरी मार झेल रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि बैंकों को एक और तिमाही में मुश्किल झेलनी पड़ सकती है, उनके मुनाफे में कमी आ सकती है। आरबीआई ने ऐसे बैंकों को दो तिमाही का मौका दिया गया है।

कर्ज फंसे होने के साथ ही आर्थिक मंदी के माहौल ने भी बैंकों की हालत खस्ता कर दी है।

एक अनुमान के मुताबिक बैंकों का करीब 8 लाख करोड़ रुपये फंसा हुआ है।

पहले की तरह बैंकों के पास अब डिफॉल्ट्स को छिपाने का विकल्प नहीं है।

नए नियमों के मुताबिक बैंकों को नॉन परफॉर्मिंग असेट्स में चले गए लोन्स से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अलग से फंड की व्यवस्था रखनी होगी।

किसी लोन की किस्त के 90 दिनों तक अदायगी न किए जाने पर उसे नॉन परफॉर्मिंग असेट्स में डाल दिया जाता है।

इस नीति के चलते दिसंबर 2015 को समाप्त तिमाही में पंजाब नैशनल बैंक, देना बैंक और सीएनबी का एनपीए 49 पर्सेंट तक पहुंच गया है।

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