कर्ज लेने के बाद उपयोग ना करने पर भारत ने 2000 करोड़ रूपए दंड (कमिटमेंट चार्ज) चुकाया

aantarrastriy karj

नई दिल्ली : देश में विकास योजनाओं को समय पर शुरू ना कर सकने पर और आंतरराष्ट्रीय कर्ज को उपयोग न कर पाने की वजह से भारत को पिछले 6 साल में 600 करोड़ रुपए दंड अंग्रेजी में कामिटमेंट चार्ज देना पड़ा है।

दरअसल कमिटमेंट चार्ज वह शुल्क होता है जो कर्जदाता समय पर लिए गए पैसे का उपयोग न करने पर लेता है।
यह चार्ज उस मूलधन पर लगाया गया है जो हमारे देश को बाहरी बैंकों से निकालना था।

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत को बहोत ज्यादा कमिटमेंट चार्ज चुकाने पड़ रहे हैं।
ये सरकार की आलस्य को भी दर्शाता है ये दिखता है कि मौजूदा सरकार जो पुराने प्रॉजेक्ट्स को पूरा करने की बात करती है, उस पर अमल नहीं कर रही।
CAG की रिपोर्ट के मुताबिक 2014-15 में 2,10,099 करोड़ रुपये बाहरी बैंकों से नहीं निकाले जा सके जिस कारण 2014-15 में सरकार को 111 करोड़ का कमिटमेंट चार्ज चुकाना पड़ा।
इससे पहले के वर्षों में क्रमशः 117 करोड़, और 93 करोड़ रुपए अदा करने पड़े।
पिछले छह वर्ष में भारत को टोटल 600 करोड़ रुपए जितना कमिटमेंट चार्ज के रूप में चुकाने पड़े हैं।
वित्त मंत्रालय के एक अध्ययन में बताया गया की 1991 से 2009 के मध्य 1,400 करोड़ रुपए का कमिटमेंट चार्ज चुकाया गया था।
यानी 1991 से 2015 तक 2000 करोड़ जितना दंड देना पडा है जो देश के लिए शर्म की बात भी है

CAG का कहना है कि इतना ज्यादा कमिटमेंट चार्ज दिखाता है कि बिना आवश्यकता के सरकार कर्ज ले लेती है फिर उसके पास धन का उपयोग करने कोई योजना तैयार नहीं होती।

31 मार्च 2015 को भारत के पास बाहरी बैंकों से लिया हुआ 3.66 लाख करोड़ रुपए का कर्ज था।
उसमे से 2.37 करोड़ रुपया उपयोग में नहीं लिया जा सका।