दुनिया का सब से बड़ा बनने वाले रामायण मंदिर में मुसलमानो ने दी अपनी जमीन

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पटना: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया में प्रस्तावित विश्व के सबसे बड़े मंदिर रामायण मंदिर के लिए तीस एकड़ ज़मीन मुसलमानों ने दी है। कुछ ज़मीन तो दान में दी लेकिन बाकी की ज़मीन के लिए ज्यादा दाम भी नहीं मांगे। वे चाहते तो मांग सकते थे क्योंकि मुसलमानों की ज़मीन ही सामने की थी।

महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने कहा, ‘मुस्लिम इस मंदिर के लिए न केवल दान में जमीन दे रहे हैं बल्कि कम कीमत पर जमीन भी मुहैया करवा रहे हैं। हम दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर बनाने जा रहे हैं। बिना मुस्लिमों की मदद के इस ड्रीम प्रॉजेक्ट को जमीन पर उतारना संभव नहीं है।’

इससे पहले कुछ मुस्लिमों ने बिहार के गया जिले में दुर्गा मंदिर के निर्माण में दान में जमीन दी थी। बेगूसराय और सीतामढ़ी जिले में मुस्लिमों ने शिव मंदिर के निर्माण में जमीन दी थी। मुंबई की कंस्ट्रक्शन कंपनी ने इन मंदिरो का निर्माण कराया था।

आगे पूरी जानकारी पढ़िए कोन है आचार्य किशोर? समाज में क्या करते है मंदिर? 

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मुसलमानों ने अपनी ज़मीन का मोलभाव नहीं किया। एक ही रेट पर हम लोगों को दे दिया। बाकी 160 एकड़ ज़मीन तो हिन्दुओं ने ही दी है। कुछ बड़े किसानों ने तो कुछ छोटे किसानों ने। ज्यादातर ज़मीन हमने खरीदी है। जबकि कुछ हिन्दुओं ने ज़मीन के लिए मोल भाव किये। हम लोग दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर बना रहे हैं। केसरिया चकिया के पास। 190 एकड़ में।’ किशोर कुणाल ने कहा जो बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के चेयरमैन हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी लेकिन नौकरी छोड़ धार्मिक कार्यों के प्रति समर्पित हो गए।

किशोर कुणाल ने 1987 में पटना रेलवे स्टेशन के पास महावीर मंदिर का जिम्मा संभाला था तब इसकी सालाना आमदनी 11000 रुपये दिखाई जाती थी। काफी कम दिखाई जाती थी। आज इसकी सालाना आमदनी आठ करोड़ रुपये की है जो चढ़ावे और लड्डू की बिक्री से आती है।

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महावीर स्थान का लड्डू अपने आप में टॉप क्लास रेसिपी है। स्वादिष्ट। महावीर स्थान मंदिर का अपना सालाना बजट 140 करोड़ का। मंदिर के पास ढाई सौ एकड़ ज़मीन हो गई है और कुल संपत्ति पांच सौ करोड़ की। मंदिर के तहत महावीर कैंसर अस्पताल, आरोग्य अस्पताल, आंख का अस्पताल और बच्चों का अस्पताल चलता है। उत्तर भारत का यह सबसे बड़ा धार्मिक चैरिटेबल ट्रस्ट बन गया है। पिछले साल कैंसर अस्पताल में गरीब मरीज़ों को एक करोड़ दस लाख रुपये की मदद दी गई। 

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सीलिंग एक्ट के तहत किसी मंदिर के पास पंद्रह एकड़ से ज्यादा की ज़मीन नहीं हो सकती है इसलिए यह मिथक है कि मंदिरों के पास हज़ारों एकड़ ज़मीन है। किशोर कुणाल का कहना है कि मंदिर अगर ‘डिवोटी फ्रेंडली’ होंगे तभी उनका विकास होगा। बिहार के मंदिरों और मठों के पास एक ज़माने में अरबों की संपत्ति हुआ करती थी जिसे महंतों ने बेच दिया। कुछ ज़मीनें कमेटियों के मेंबरों ने हेराफेरी में गायब कर दीं तो कुछ पर लाल झंडे का कब्ज़ा हो गया। जो मंदिर पुराने ज़मीन जायदाद पर आधारित हैं उनकी हालत बहुत खराब है। 

किशोर कुणाल ने महावीर मंदिर में पहली बार दलित पुजारी बनाया था। धार्मिक न्यास बोर्ड के चेयरमैन के नाते एक दर्जन मंदिरों में दलित पुजारी बनाए। बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास एक्ट के तहत बना है बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड। इसके चेयरमैन के आदेश की अपील जिला जज या हाई कोर्ट के पास होती है।

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महावीर मंदिर में लोगों ने रूद्राभिषेक पूजन के लिए एडवांस बुकिंग होते है और पहेले से बुकिंग फुल हो जाते है. सिनेमा देखने के लिए लोग पहेले से बुकिंग करवाते है पूजन के लिए उतनी फ़िक्र सच्चे भक्तो को ही होती होगी 
यह पटना से 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर को बनाने में 500 करोड़ रुपए खर्च होंगे।’

कुणाल ने कहा कि विराट रामायण मंदिर कंबोडिया में 12वीं शताब्दी के फेमस मंदिर अंगकोर वाट से भी बड़ा होगा। यह मंदिर 215 फीट ऊंचा होगा। इस कैंपस में 18 मंदिर होंगे। सबसे ऊंची शिव मंदिर की चोटी होगी। उन्होंने कहा कि मंदिर हॉल में 20 हजार लोगों की बैठने की क्षमता होगी। मुख्य मंदिर राम-सीता और लव-कुश के लिए है।