पढ़िए स्टार्टअप इंडिया से शुरू हुई इतनी सारी कंपनिया कहा से कहा पहुच गई

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Gujju Post

नई दिल्ली: अच्छे दिनों की आश में शुरू हुई स्टार्टअप कंपनियों पर अब ग्रहण लगना शुरू हो गया है. मुनाफा न मिलने, परिचालन और लागत का खर्च भी ना निकल पाने और निवेशक के अभाव में स्टार्टअप कंपनियां फंड की कमी से जूझ रही हैं.
पिछले 8 महीनों के दौरान कंपनियों के बंद होने, बिकने या ब्रांडों को खत्म करने, वेतन में देरी, छंटनी और शेयरधारकों की ओर से चेतावनी मिलने जैसे कई मामले सामने आए हैं, जो ई-कॉमर्स की खराब सेहत का संकेत दे रहे हैं.

कई स्टार्टअप कंपनिया जो शुरू होते ही ब्रांड बन गई थी लोगों की जुबान पर थी पर अब गुमनाम हो गई हैं. हाल ही में टाइनी आउल, पेपरटैप, जूरूम्स, पर्पल स्क्वरल, फैशनारा और इंटैलिजेंट इंटरफेसेस जैसे बड़े स्टार्टअप का शटर डाउन हो चुका है. एक्सक्लूसिवली और टैक्सीफॉरश्योर के बाद आस्कमी भी बंद होने की सूची में जुड़ गई है.
कई IIT के नवयुवा यो ने स्टार्टअप में बढ़ चढ़ के हिस्सा लिया था जो बहोत अच्छा कार्य है पर उन्होंने कंपनी को बंद होने से बचाने कर्मचारियों की छटनी करने का सोर्टकट और घटिया मार्ग अपनाया पर एक भी स्टार्टअप जिन्होंने कर्मचारियों को निकाला वो ज्यादा चल ही नहीं सकी.

आस्कमी’ डॉट कोम 

  • आस्कमी.कॉम कंज्यूमर इंटरनेट सर्च कंपनी भी अपना परिचालन बंद कर दिया है.
  • अधिकारियों ने बताया कि फंड जुटाने में नाकाम रहने से कंपनी ने अपने कई कार्यालय बंद कर दिए हैं जिनमें गुडग़ांव स्थित मुख्य कार्यालय भी शामिल है.
  • आस्कमी अपनासंपूर्ण परिचालन 1 सितंबर को पूरी तरह से बंद कर देगी.
  • कंपनी के ऑनलाइन मार्केटप्लेस ई-ग्रोसरी, फाइनैंस और अन्य व्यवसाय नकदी की किल्लत से जूझ रहे थे.
  • 2000 कर्मचारियों को वेतन बकाया है और 150,000 से अधिक विक्रेताओं के बकाया का भुगतान नहीं किया गया है.
  • आस्कमी ग्रुप में मलेशिया के अरबपति टी आनंदा कृष्णन की एस्ट्रो होल्डिंग के स्वामित्व वाली गेटइट इन्फोसर्विसेज की बड़ी हिस्सेदारी है.

टैक्सीफॉरश्योर

  • कैब एग्रीगेटर टैक्सीफॉरश्योर का है, जिसे 18 महीने पहले भावेश अग्रवाल के नेतृत्व वाली कंपनी ओला ने करीब 20 करोड़ डॉलर (तकरीबन 1300 करोड़ रुपये) में खरीदा था.
  • कंपनी के कॉल सेंटर, ड्राइवर रिलेशन, बिजनेस डेवलपमेंट और कस्टमर केयर विभाग के कर्मचारियों पर छटनी की तलवार लटक रही है.
  • कहा जा रहा है कि कर्मचारियों की छंटनी से हर महीने 30 करोड़ रुपये की बचत होगी.
  • ओला की स्थापना 2011 में हुई थी. कंपनी में टाइगर ग्लोबल, मैट्रिक्स पार्टनर्स, सिक्योआ कैपिटल, स्टीडव्यू कैपिटल और हाल में ही सॉफ्टबैंक आदि ने निवेश किया है.

एक्सक्लूसिवली.कॉम

  • बुरे दिन फैशन पोर्टल एक्सक्लूसिवली.कॉम के भी आये है. जिसे स्नैपडील के कुणाल बहल ने बंद करने का निर्णय किया है.
  • स्नैपडील ने फरवरी में ही 2.5 करोड़ डॉलर (करीब 162.5 करोड़ रुपये) में शेयर और नकद सौदे के तहत इसे खरीदा था.
  • स्नैपडील ने अपने इस कदम को एकीकरण बताया है लेकिन एक सच यह भी है कि एक्सक्लूसिवली.कॉम प्रवर्तक कंपनी द्वारा तय लक्ष्य को पूरा करने में विफल रहा है.
  • अब एक्सक्लूसिवली के सभी प्रोडक्ट स्नैपडील पर ही उपलब्ध होंगे. इनकी डिलीवरी भी स्नैपडील के नेटवर्क के जरिये की जाएगी.

इंटेलिजेंट इंटरफेसेस

  • हाउसिंग डॉट कॉम के पूर्व सीईओ और को-फाउंडर राहुल यादव ने इंटेलिजेंट इंटरफेसेस नाम का स्टार्टअप शुरू किया था.
  • इस कंपनी को फिल्पकार्ट के सचिन और बिन्नी बंसल के अलावा क्रिकेटर युवराज सिंह से भी फंड मिला था, लेकिन उनका यह वेंचर भी फेल साबित हुआ.
  • राहुल को अपनी कंपनी ‘इंटेलीजेंट इंटरफेस’ के लिए 170 करोड़ फंड आने की उम्मीद थी. राहुल यादव ने इस कंपनी की स्थापना के दौरान कहा था कि यह सरकार की डेटा एनालिसिस में मदद करेगी।
  • हास्यास्पद बात यह भी है की उनकी फर्म को न सरकार से और न ही किसी निजी एजेंसी से अब तक कोई काम मिला.

टाइनी आउल

  • टाइनी आउल 2014 में मुंबई IIT के मंदाद, गौरव चौधरी, सौरभ गोयल, शिखर पालीवाल और तनुज खंडेलवाल ने शुरू की थी.
  • रेस्त्रां सेवाएं प्रदान करने वाला स्टार्टअप टाइनीआउल इस खंड का जाना-माना स्टार्टअप था लेकिन 22 मई 2016 के बाद यह ब्रांड गुम हो गया.
  • सिकोया व मैट्रिक्स ने टाइनी आउल में बहोत ज्यादा निवेश किया था.
  • लॉजिस्टिक की ऊंची लागत एवं बाजार में मिल रही प्रतिस्पर्धा के चलते टाइनीआउल काफी समय पहले से फंड से जूझ रही थी.
  • कंपनी ने अपनी वित्तीय सुधारने के लिए कर्मियों की छंटनी की थी लेकिन यह तरीका कारगर नहीं रहा. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पिछले तीन वर्षों में लगभग 400 रेस्त्रां स्टार्टाअप खुले हैं.

पेपरटैप

  • इससे पहले अप्रैल में ग्रोसरी स्टार्टअप पेपरटैप ने भी बिजनेस ठप होने की वजह से 500 लोगों को निकाला था।
  • स्नैपडील के समर्थन वाली पेपरटैप ने अपनी नकदी से जूझ रहे किराना की आपूर्ति के परिचालन को बंद कर दिया है.
  • कंपनी अब केवल लॉजिस्तिक कारोबार पर ध्यान केंद्रित कर रही है.

इसके अलावा बहोत सारे नाम है जिनकी बदत्तर हालत हो चुकी है
जूरूम्स, पर्पल स्क्वरल, फैशनारा भी अपना कारोबार समेट चुकी हैं.
इस जैसी एक दर्जन से अधिक स्टार्टअप कंपनियां फंड की कमी के चलते बंद होने की कगार पर हैं.

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