ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा के मामले में UP,बिहार,MP,राजस्थान से भी घटिया स्तर है में है गुजरात

अहमदाबाद

गुजरात सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले डॉक्टरों को अतिरिक्त सुविधाएं और पेसा देने का खोखला दावा करती है, वहीं प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। डॉक्टरों की यह कमी इतनी ज्यादा है कि बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे देश के बीमारु माने जाने वाले राज्यों में भी स्वास्थ्य सेवाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं का स्तर गुजरात से बेहतर है और गुजरात का उन सब से गिरे हुए स्तर का है.

विशेषज्ञ डॉक्टरों की इस कमी का सबसे ज्यादा खामियाजा प्रदेश की महिलाओं और बच्चों को उठाना पड़ रहा है। तथाकथित रूप से भारत के विकसित राज्यों में से एक गुजरात की छवि के साथ यह स्थिति सही नहीं बैठती। प्रसव के समय प्रति 1 लाख महिलाओं के बीच मृत्युदर जहां गुजरात में 127 है। ये आंकड़े पिछली बार 2013 में जारी किए गए थे। नवजात शिशुओं के मृत्युदर की संख्या प्रति 1,000 पर 30 बच्चों की है।

गुजरात विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी में देश का पांचवा राज्य है। इन डॉक्टरों में महिला रोग विशेषज्ञ, सर्जन, फिजिशियन और शिशु रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्य भी इस मामले में गुजरात से आगे हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की इस कमी का प्रमुख कारण रिक्त पदों पर भर्ती के लिए राज्य सरकार द्वारा मंजूरी ना दिया जाना है। प्रदेश में जहां 320 सर्जनों की जरूरत है, वहीं अभी केवल 32 ही सर्जन मौजूद हैं यानी 288 सर्जनो की कमी है । बिहार में सर्जनों की संख्या में जहां 49 सर्जनों की कमी है, वहीं मध्य प्रदेश में 283 सर्जनों की कमी है।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपकेंद्रों की हालत भी काफी खराब है। इन केंद्रों पर स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के मामले में गुजरात देश में दूसरे नंबर पर है। जहां प्रदेश में 9,310 स्वास्थ्यकर्मियों की जरूरत है, वहीं अभी केवल 6,938 स्वास्थ्यकर्मी ही उपलब्ध हैं। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि ग्रामीण इलाकों के 247 प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्रों में एक भी स्वास्थ्यकर्मी नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जहां बिहार और राजस्थान के पास अतिरिक्त डॉक्टर हैं, वहीं गुजरात इस मामले में कमी के पैमाने पर तीसरे पायदान पर बैठा है। केवल उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की हालत गुजरात से ज्यादा खराब है।

पर हमेशा की तरह सरकार इन आंकड़ो को सुधार ने की जगह खुद की वाहवाही करती नजर आई 

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल ने कहा कि डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों द्वारा ग्रामीण इलाकों में काम करने को लेकर दिखाई जा रही अनिच्छा के कारण ही ऐसे हालात पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘बाकी राज्यों में लोगों के पास खरीदने की क्षमता मजबूत नहीं है। वहीं गुजरात के लोग स्वास्थ्य सेवाओं पर पैसा खर्च करने की स्थिति में हैं। यही कारण है कि यहां निजी क्लीनिक और अस्पताल बढ़ रहे हैं। लोग इलाज के लिए वहीं जाते हैं।’

पूर्ण पोस्ट पढ़ने के लिए Next Button क्लिक करें